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ईशवर की कारीगरी


प्राचीन परंपराओं के शासन में जीवित समझे जानेवाले देशों में स्थिर चरित्र अधः पथन के काल में अचानक अरब की जंगलों में एक विरोधी का आगमन हुआ जो बिलकते हुए इस बूढे शासन का पीछा करने लगा, और इसी प्रकार से वह पश्चिम में जन्म लेने वाली नई-नई शासनों का भी वह बडा विरोधी था। इस विरोधी की समानता देखते-देखते बडती गई, इस प्रकार से कि ईशवर की पर्यवेक्षण ही उसके स-ह्रदय सेना को युद्ध और सफलता की ओर ले जा रही है, यहाँ तक की सीरिया और ईजिप्ट की फतह के कुछ समय बाद ही शासनीयों का साम्राज्य समाप्त होने लगा, और कोंसटेंटाइन मित्रों को भी इसी प्रकार कि अंत चेतावनी मिलचुकी थी।