हम उन (रसूलोंके) बीच कोई अंतर नही रखते।
खुराने करीम ही वह एक दिव्य किताब है जो दूसरे आसमानी किताबों को मान्यता देती है। जब कि हम यह देखते हैं कि दूसरी सारी किताबें एक दूसरे को स्वीकार नही करती है।

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