विकास और पुन निर्माण

विकास और पुन निर्माण
इस्लाम प्रतिभा और व्यक्तिगत उत्कृष्टता को मान्यता देता है। इस्लाम विकास और पूर्निर्माण का धर्म है न कि तोड फ़ोड का। उदाहारणः अगर कोई व्यक्ति एक ज़मीन का मालिक है, वह धनी भी है, उस्को इस ज़मीन की खेती करने कि आवश्यकता नही है, और वह इस ज़मीन को वीरान छोड दिया है। ऐसी स्थिति में एक लम्बा समय बीत गया, तो इस्की यह ज़मीन अपने आप लोक संपति बन जाती है, और इस्लामिक नियम यह निर्णय लेते हैं कि इस संपत्ति का अधिकार उस व्यक्ति को प्राप्त हो जायेगा, जो सबसे पहले इस ज़मीन की खेति कर सकता हो ।

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