वास्तविक सुख
नमाज़ पडते समय मुसलमानों के भीतर जो भावनाएँ होती है उनही भावनाओं से मैं भी प्रभावित हुँ। यही वो विषय है जिसकी मैं आभारी हुँ, इसी प्रकार से मेरी संतान भी सुख में है, और निशचिंत रूप से मुझे इस्से अधिक कुछ नही चाहिये।

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