मान्वता की	 प्रसन्नता
किसी मन को यह बात अजीब ना लगे की पश्चिमी आधुनिक संस्क्रुति सारी मानव्ता को सुखी रखने में और मानव्य प्रसन्नता उपलब्द कराने में नाकाम हो गई और लोगों को अप्रसन्नता, भ्रम में ले डूबी है, इसलिए की आधुनिक ज्ञान के सारे प्रयास विनाष और बरबादी की ओर ले जाते हैं, और इस प्रकार की स्थिती में आधुनिक ज्ञान को पूर्णता से भरपूर मान्ना, या उस्को मानवता की सेवा का साधन समझना (जैसा की इस्लामी युग में था) बहुत दूर की बात है ।

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