मानव्य धर्म
अपने सारे जिवन में खोये हुए अपने व्यक्तित्व को मैने इस्लाम धर्म में पाया है, और उस समय पहली बार मेरे भीतर यह भावना पैदा हुइ कि मैं मानव हूँ । इस्लाम मानव को उस्के व्यक्तित्व कि ओर लेजाता है, जो मानव्य व्रुत्ति के बिलकुल एक समान है ।

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