न्याय और पवित्रता
इस पुर्ष के अंदर अपने सिद्धांतों के लिये अत्याचार और ज़ुल्म को उठाने की क्षमता, और इस पुर्ष को अपना सरदार और मुख्या मानने वाले, उस पर विश्वास करने वाले, अनुयायी लोगों कि उच्च नैतिकता, इसके साथ-साथ इस पुर्ष के महान कर्म उसके व्यक्तित्व में न्याय और पवित्रता होने का खुला प्रमाण है। मुहम्मद को केवल झूटा दावा करनेवाला समझने से समस्याएँ और अधिक हो जायेंगी, जिसका कोई साधन नही होगा। बल्कि प्रचीन इतिहास में कोई ऐसा व्यक्ति नही, जिस को मुहम्मद के समान सही सम्मान मिला हो।

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