धार्मिक और रोगी
मुझे वह समय अच्छी तरह याद ज्ञान है जिसमें लोगों के अंतर्गत शिक्षा और धर्म के बीच आपसी प्रतिकर्षण के अलावा कोई बात-चीत ना होती थी। लेकिन यह झगडा अपरिवर्तनीय ढंग से निष्कर्ष रहा। जब कि विज्ञान मनोरोग की नई खोज धर्म के सिध्दातों का संकेत देती हैं। क्यों और कैसे इसलिए मनोवैज्ञानिकों का मत है कि मज़बूत धर्म, नामाज़ और धर्म की स्थिर रुप से अनुकरण करना, चिंता, आशंका और तनाव को दूर करता है और जिन बीमरियों से हम पीडित हो रहे हैं असमे से आधे से ज्यादा बिमारियों के लिए मुक्ति है यहाँ तक कि डाँ ए.ए. प्रेल ने कहा कि धार्मिक (मनुष्य) व्यक्ति वास्तव में कभी भी मानसिक रोगों से पीडित नही होता है

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