ईश्वर का मनुष्य को सम्मान प्रधानकरना
वो इस्लाम जो अल्लाह का बनाया हुआ नियम है। इसको हम शुध्द रुप से महसूस करते हैं। केवल अल्लाही के आदेश से पहाड, समंदर, ग्रह और सितारे चलाते हैं अपनी कक्षाओं में घूमते हैं। ये सारा ब्रह्माण्ड उसी अल्लाह के आदेश का पालन करता है। इसी प्रकार इस ब्रह्माण्ड का कण-कण यहाँ तक के निर्जीव भी अल्लाह के आदेश का पालन करते हैं। लेकिन मनुष्य इस कानून से अपवर्जित है। क्यों के अल्लाह ने मानव को मनो भावना की स्वतंत्रता देखा है। इसीलिए मानव को ये छूट प्रात्प है वो अल्लाह के आदेश के आगे आत्मसमर्पण करें या स्वयं कोई नियम बनाले और अपने पसंदीदा धर्म पर चलें दुर्भाग्य से मानव ने अधिकाश तोर पर दूसरा मार्ग अपने लिए पसंद किया हैं।

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