इस्लाम और सभ्यता
ख़ुरआन में मानव और प्रकृति के बीच कोई अंतर नही है। इस्लामिक संसार मानवता के लिये उपयोकता ज्ञान और तत्वदर्शता की भरमार पूँजी रखता है।

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