मानवीय महान लोगों में से सब से प्रमुख व्यक्तित्व

मानवीय महान लोगों में से सब से प्रमुख व्यक्तित्व

मानवीय महान लोगों में से सब से प्रमुख व्यक्तित्व

राषिदः अपने दोनों मित्र के पास सतर्क होकर पहुँचा। उसके हाथ में पुस्तक थी और कंधे पर लापटॉप था .... जैसे ही उनके निकट हुवा तो तुरंत नमस्कार किया, और उनसे पुनः उत्तर का इंतजार नही किया, फिर यह कहने लगाः

आज मैं अपने मित्र माइकल की इच्छा पूरी करूँगा ।.... चलो मैं अब तुम्हारे सामने वह महत्वपूर्ण चीज़ों का विस्तार करूँ, जो इस्लाम धर्म के साथ विशिष्टता रखते हैं। कोई भी व्यक्ति इन चीज़ों की महत्वता का इंकार नही करता, वह विशिष्ट चीज़े यह हैं, इस्लाम धर्म के रसूल मुहम्मद (सल्लेल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर विश्वास करना... मैं ने तुम दोनों के लिए एक पश्चिमी आलोचक की वह पुस्तक ले आया हूँ, जो मुहम्मद के बारे में लिखी गयी है..... सुनो वह आलोचक क्या कहता है....

माइकलः धीरज प्रिय राषिद।... मेरा अनुमान था कि इस्लाम धर्म की महत्वपूर्ण विशेषता प्रभु के प्रति उसके विचार हैं।

राषिदः समग्र रूप से बिल्कुल सही है.... लेकिन मैं ने कई कारणों से उसको छोड दिया। कुछ महत्वपूर्ण कारण यह हैः

इस्लाम धर्म रसूल सल्लेल्लाहु अलैहि वसल्लम का संदेश होने के रूप में यह नही मानता है कि देवत्व का विचार रसूल के द्वारा बनाया हुवा एक नया विचार है। बल्कि वह तो आदम से लेकर ईसा मसीह तक, फिर मुहम्मद तक आनेवाले सारे रसूलों का धर्म है। बल्कि वह तो सारी मानवता का धर्म है... और हुवा यह कि मानवता इस धर्म से विचलन हो गयी, और उसके विचारों का विकृत किया। फिर इस्लाम धर्म आया। अल्लाह के साथ विश्वास का पुनर्निर्माण किया। सारे लोगों को अल्लाह के एकत्व के सिद्धांत की ओर, और उसकी प्रार्थना में किसी को साझीदार बनाने की ओर बुलाया.... किन्तु इस्लाम धर्म में विश्वास करने और अल्लाह के एकत्व का सिद्धांत स्वयं मानव की सृष्टि से सारे इतिहास की विस्तारित श्रंखला की एक नयी कडी है। जो इस संसार के विनाश होने से पहले समाप्त नही होगी... निस्संदेह इस्लाम वह धर्म है, जो इस्लाम के रसूल मुहम्मद का जन्म होने से पहले भी था।

दूसरा कारण यह था कि हमारी पिछली बैठकों में जिन विचारों पर हम सहमत हो गये थे, उसको सामने रखते हुए मैं ने यह सोंचा कि देवत्व विचार के प्रति चर्चा करने की आवश्यकता नही रही।

राजीवः क्या तुम्हारा अर्थ यह है कि इस्लाम धर्म में वह सारे गुण उपलब्ध है, जिसके बारे में हमने चर्चा की।

राषिदः हाँ। यह सत्य है।

राजीवः तो फिर कितना ही अच्छा होगा कि तुम अपनी बात प्रस्तुत करने से पहले-पहले सारांश रूप में देवत्व के प्रति इस्लाम धर्म के विचारों का विवरण करो।

राषिदः ठीक है। इस्लाम धर्म में एक ही प्रभु है, जिसने शून्य से मानव को और सारे प्राणियों को पैदा किया। सारे ब्रह्माण्ड में कोई चीज़ उसके समान नही है। उसी ने ब्रह्माण्ड के नियम बनाये, जिनको हम प्रकृति के नियम कहते हैं। उसी ने ब्रह्माण्ड के हर चीज़ को विशेष आकार और विधि में रखा। वह हर विषय से महान, बडा, प्रभुत्व है....

उसके व्यक्तित्व, गुण, कार्यकालाप में कोई विषय उसके समान नही है। वही उत्तम, उच्च है। किसी भी प्रकार से उसके व्यक्तित्व में निम्नता नही है। वह न किसी से पैदा हुवा, और न कोई उससे पैदा हुवा। न कोई उसका साझीदार है, न कोई उसके समान है। वही एक है जो मौत और ज़िंदगी देता है। वह प्राणी में प्रवेश नही करता है, और न कोई प्राणी उसमें प्रवेश करती है। ....

वही प्रभु जो एकत्व (अकेला) है, इसके अलावा किसी और की प्रार्थना नही की जायेगी। उसके राजतंत्र में कोई उसका भागीदार नही है, न कोई उसके समान है। न कोई उसका मंत्री है, न कोई उसका सलाहाकार है, जिसकी प्रार्थना की जा सके। न कोई ऐसा मध्यवर्ती है, जो उसके अनुमति के बिना सिफारिश कर दे। और उसका प्रिय बना दे। किन्तु हर रूप में प्रार्थना उसी एक के लिए संपूर्ण है।

माइकलः तुम जो पुस्तक अपने साथ लाये हो, उसमें किस विषय पर चर्चा की गयी है ?

राषिदः यह पुस्तक मानवीय इतिहास में शाश्वत रहने वाले व्यक्तियों के बारे में चर्चा करती है। डाक्टर माइकल हार्ट इसके लेखक है। जो खगोल वैज्ञानिक और गणितज्ञ है, और अमेरिकी अंतरिक्ष विभाग में काम किया करते थे।

माइकलः एतिहासिक अध्ययन से इस वैज्ञानिक का क्या संबंध है? ।

राषिदः एतिहासिक अध्ययन इस वैज्ञानिक के लिए आनंद उठाने का साधन था। उसने यह नोट किया करोडों लोगों में से हज़ारों लोगों के बीच परिशोधक संस्थाओं ने केवल बीस हज़ार व्यक्तियों का नाम वर्णन किया। इस वैज्ञानिक ने इन बीस हज़ार में से प्रमुख महान व्यक्तियों को चुनने के लिए कुछ नियम निर्धारित किये। इन नियमों में से कुछ मुख्य नियम यह हैः वह व्यक्ति वास्तविक हो, अयथार्थ और अज्ञान न हो। उसका अच्छा या बुरा प्रभाव बड़ा गहरा हो। उसका प्रभाव विश्व व्याप्त हो। यह प्रभाव मानवीय इतिहास में विस्तारित हो... मेरे अनुमान से यह नियम इस विषय में बहुत उत्तम है।

राजीवः इस वैज्ञानिक लेखक की दृष्टि से शाश्वत महान व्यक्ति कौन है ?

राषिदः इस लेखक ने इतिहास में शाश्वत रहने वाले 100 व्यक्तियों के नाम चुने, इनमें से सबसे पहले व्यक्ति इस्लाम धर्म के रसूल मुहम्मद सल्लेल्लाहु अलैहि व सल्लम है। लेखक ने इसके कुछ कारण विवरण किये हैं, जो यह है....

फिर राषिद ने पुस्तक निकाली और यह पढने लगाः

मैं ने इस सूची के प्रथम अंक में मुहम्मद को चुना है। मेरे इस चयन से अधिकतर लोग ज़रूर आश्चर्य चकित होंगे। उन्हें इसका अधिकार भी है। लेकिन मुहम्मद ही इतिहास में वह एक इंसान है, जो धार्मिक और सांसारिक स्थर से पूर्ण सफलता प्राप्त की है।

उन्होंने इस्लाम का प्रचार किया। सारे धर्मों में प्रमुख धर्म के रूप में इस्लाम को प्रस्तुत किया। वह राजनीतिक नेता, कमांडर और धार्मिक महात्मा बन गये.... उनकी मृत्यु के 13 शताब्दों के बाद भी आज तक मुहम्मद का प्रभाव सर्व व्याप्त और नवीकृत है।

फिर अमेरिकी लेखक यह कहता हैः.... हो सकता है कि इस सूची के प्रथम अंक में मुहम्मद का होना आश्चर्यचकित लगे, क्योंकि ईसाइयों की संख्या मुसलमानों से दुगना है। हो सकता है कि इस सूची में मुहम्मद का प्रथम होना अधिकतर लोगों को भ्रम में रख दिया भी हो, जब कि ईसा अलैहिसलाम नंबर 3 पर, और मूसा अलैहिसलाम नंबर 16 पर हैं।

लेकिन इसके कई कारण है। इनमें से एक कारण यह है कि इस्लाम का प्रचार करने में, उसको मज़बूत बनाने में, और उसके नियमों की स्थाप्ना करने में, मुहम्मद सल्लेल्लाहु अलैहि व सल्लम की भूमिका ईसा अलैहिसलाम से बहुत बडी और महान थी। हालांकि ईसाई धर्म में नैतिक नियमों के ज़िम्मेदार ईसा तो हैं लेकिन सेंट पॉल ने ईसाई धर्म के नियमों की स्थाप्ना की है, और बाईबल में लिखी हुई कई बातों का ज़िम्मेदार वह भी है।

जब कि मुहम्मद सल्लेल्लाहु अलैहि व सल्लम इस्लामिक नियम, धार्मिक क़ानून, सामाजिक व नैतिक व्यवहार, और संसारिक व धार्मिक जीवन में लोगों के बीच होने वाले व्यवहारिक नियम की स्थाप्ना करने के ज़िम्मेदार इस्लाम धर्म के रसूल ही है। इसी प्रकार पवित्र खुरआन केवल उन्ही पर अवतरित हुवा है, और पवित्र खुरआन में मुसलमानों ने अपने संसार और परलोक की प्रत्येक आवश्यकता को उपलब्ध पाया है।.... क्या तुम इस बात से आश्चर्यचकित हो रहे हो ? ।

राजीवः वास्तविक रूप से यहाँ इस बात में कुछ सोंच-विचार की आवश्यकता है। लेकिन मुझे तुम यह कहने की अनुमति दो कि यह लेखक मानव अध्ययन का विशेषज्ञ नही है।

राषिदः हाँ। वह मानव अध्ययन का विशेशज्ञ तो नही है। लेकिन उसकी बात ठोस और वस्तुनिष्ठ नियमों पर आधारित है। यहाँ इस लेखक के द्वारा मुहम्मद सल्लेल्लाहु अलैहि व सल्लम के पक्षपात का भी संदेह नही है, क्योंकि वह यहूदी है। अगर तुम अन्य लोगों की गवाही सुनना चाहते हो, तो मुझे अनुमति दो कि मैं इनमें से कुछ का विवरण करूँ।....

फिर राषिद ने अपना लाप-टाप निकाला। अपने कुछ रिकार्ड पढने लगा। फिर उसने कहाः

देखो मेरे मित्रः

फ्रेंच कवि लामार्टिन कहता हैः किस पुरुष ने उस प्रकार की मानवीय महानता प्राप्त की है, जिस प्रकार मुहम्मद ने प्राप्त की ?। किस मानव ने अद्भुतता के उच्च स्थान को प्राप्त किया, जिस प्रकार मुहम्मद ने प्राप्त किया ?। निस्संदेह मुहम्मद प्रजापति और प्राणियों के बीच मध्यवर्ती की भूमिका निभाने वाले ग़लत सिद्धांतों को समाप्त कर दिया।

जर्मनी के प्रथम कवि गोतह कहता हैः मैं ने इतिहास में मानव के उच्च नैतिकता की खोज की, तो मुझे यह नैतिकता अरब के रसूल मुहम्मद सल्लेल्लाहु अलैहि व सल्लम में मिली।

रूस के प्रसिद्ध दार्शनिक व आलोचक लियो टालस्टय कहता हैः मैं उन लोगों में से एक हूँ, जो मुहम्मद सल्लेल्लाहु अलैहि व सल्लम के व्यक्तित्व से उत्तेजित हूँ, जिनको अल्लाह ने इसलिए चुना कि अंतिम देवत्व संदेश उनके द्वारा भेजा जाये, और अंतिम रसूल भी वही हो।

ऐरलान्ड का लेखक व आलोचक (साहित्य में नोबल पुरस्कार का तिरस्कार करनेवाला प्रसिद्ध व्यक्ति) जार्ज बर्नार्डशाह कहता हैः मै इस्लाम के रसूल मुहम्मद की जीवन चर्या कई बार गहराई के साथ पढा। मैं ने उनके जीवन में केवल वही नैतिकता पायी, जैसी होना चाहिए। कितनी बार मैं ने यह आशा की इस्लाम धर्म इस जगत का मार्ग बन जाये। मै ने मुहम्मद को एक अद्भुत पुरुष के रूप में पढा है, तो मैं ने उसको ईसा मसीह के साथ विरोध करने से बहुत दूर पाया। किन्तु मुहम्मद को मानवता को मुक्ति दिलाने वाला कहना आवश्यक है।

माइकलः यह बात चीत मुहम्मद की महानता के आस-पास घूम रही है। लेकिन यह कैसे साबित हो कि मुहम्मद वास्तविक रूप से अल्लाह के रसूल हैं ?

राषिदः सुनो मेरे मित्र । स्विट्जरलैंड के धर्म शास्त्र वैज्ञानिक डाक्टर हैन्स क्विंग कहता हैः मुहम्मद समग्र रूप से सच्चे नबी हैं। आज तक हमारे लिए यह असंभव है कि हम मुहम्मद को मार्गदर्शक न माने, और मुक्ति के मार्ग की और ले जाने वाला नेता होने का इंकार करे।

अन्य और भी कई प्रमाण है, जो मुहम्मद को अल्लाह का सच्चा रसूल साबित करते हैं।

माइकलः अगर तुम्हे वह प्रमाण अभी याद है, तो वह सारे या कम से कम कुछ प्रमाण ज़रूर प्रस्तुत करो।

राषिद अपने लाप-टाप में अपने रिकार्डस देख रहा था, फिर उसने कहाः

मुहम्मद सल्लेल्लाहु अलैहि व सल्लम की सत्यता का एक प्रमाण यह है कि देवत्व पुस्तकों ने आपके आने की शुभ-सूचना दी है। तौरात के प्रथम पाँच खंड (अल-इसहाः 18, अनुच्छेद 15-30) में प्रभु ने मूसा से यह कहाः मैं बहुत जल्द बनी-इसराईल के लिए उनके भाइयों में से तुम्हारी तरह एक नबी भेजूँगा। मै अपनी वाणी को उसके मुँह में रखूँगा। वह बनी-इसराईल से वही कहेगा जिसका मै आदेश दूँगा, और जो मेरे इस प्रतिनिधि की बात स्वीकार नही करेगा, तो मै उससे और उसकी संतान से बदला लूँगा। यह बात सब जानते हैं कि बनी-इसराईल के भाई बनी-इसमाईल (यानी अरब) है। इसी प्रकार मूसा और मुहम्मद के बीच किसी भी अन्य रसूल से अधिक समानता पायी जाती है। और मै अपनी वाणी को उसके मुँह में रखूँगा का वाक्य भी मुहम्मद के निरक्षर होने की ओर संकेत देता है।

बाइबल जॉन (अल-इसहाः 15 अनुच्छेद 15) में यह आया है कि ईसा मसीह ने अपने साथियों से कहाः मै तो जा रहा हूँ। अब तुम्हारे पास प्रभु की आत्मा वारख़लइट आयेगी, जो अपनी ओर से कुछ नही कहेगा। केवल वह तो वही बात बतायेगा, जो उससे कही जायेगी। वह मेरे प्रति गवाही देगा और तुम भी गवाही दोगे, क्योंकि तुम अन्य लोगों से पहले मेरे साथ रहे हो। वारखलइट यूनानी भाषा का शब्द है, जो हक़ीकत में पेरीक्लेटस (PERIQLYTOS) है। इसका माना अधिक प्रशंसा करना है। तो इस शब्द का अर्थ यह हुवाः बहुत प्रशंसा करने वाला, या प्रशंसा करने वाला, या वह जिसकी अधिक प्रशंसा की जाय। यही अर्थ अरबी भाषा में इस्लाम धर्म के रसूल का नाम मुहम्मद का है।

मुहम्मद सल्लेल्लाहु अलैहि व सल्लम की सत्यता का सबूत यह भी है कि आप ने अदृश्य की सूचना दी, बल्कि आप ने तो कुछ अदृश्य चीज़ों का सटीक वर्णन किया। आपने कई विषयों के प्रारंभ ही मे उनके अंत की खबर दी है। आपके संदेश का वैज्ञानिक रूप से चमत्कारी होना, और आपके लाये हुए धर्म के नियमों का संपूर्ण रूप से दृढ़ होना भी एक सबूत है....

माइकलः कहाँ की बात कर रहे हो ? यह सब कहाँ से ले आये हो?। हमारे सामने तो कुछ उदाहरण प्रस्तुत करो।

राषिदः पवित्र खुरआन में बहुत सारे उदाहरण है। यह वह पुस्तक है जिसको अल्लाह ने मुहम्मद की ओर वही (रहस्योद्घाटन) के द्वारा अवतरित किया, और यह पुस्तक मुहम्मद का सबसे बडा चमत्कार है।

राजीवः तो फिर मुख्य बात यह होगी कि हम सब से पहले पवित्र खुरआन के प्रति जानकारी प्राप्त कर लें, जिसके द्वारा हम यह ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे कि तुम्हारे रसूल की सत्यता किस हद तक सही है, और हम इस धर्म के नियम जान सकेंगे।

राषिदः यह बात सही है। और मैं तुम्हे यह सलाह दूँगा कि हम इसका अगली बैठक में चर्चा करेंगे।

माइकलः हमारी वापसी से पहले पहले मै यह जानना चाहूँगा कि जो पुस्तक तुम्हारे पास है, उसको मै कहाँ से खरीद सकूँगा ?

राषिदः यह पुस्तक मेरे पास कई वर्षो से हैं। लेकिन मैं ने अपने हास्टल के नज़दीक बुक डिपो में इस पुस्तक का नया प्रिंट देखा। हम अगली बैठक से पहले ज़रूर उस बुक डिपो जायेंगे ।




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